Friday, February 20, 2009

आवाज़ें


एक पुरानी किताब के पन्नोँ पे आज उंगली चलाई
जाने कहाँ से कुछ धीमी आवाज़ें आई

आवाज़ एक जानी पहचानी सी
आवाज़ें कुछ बरसों पुरानी सी

एक हँसी थी दूर से आती हुई
गूंजती थी दिल को भरमाती हुई



कितनी ही बातें थी उस आवाज़ में
जाने क्या कह गई अपने ही अंदाज़ में

एक संगीत खामोशी की नींद तोड़ता हुआ
पुरानी ग़ज़लों का दुशाला ओढ़ता हुआ

कुछ सवाल उठे उचक कर ऐसे
नींद से कोई बच्चा जागता हो जैसे

बूढ़ी पंखुडियों से बुझी राख टटोल रहा था
उस किताब में दबा एक गुलाब बोल रहा था

मेरा हाथ पकड कर वो मुस्कुराने लगा
किन्ही बिछडे रास्तों पर ले जाने लगा

कुछ सोच कर मैने उसका हाथ झटक दिया
किताब बंद कर उसका मुंह भी बंद कर दिया

9 comments:

  1. Kasam se Aisee Poem tu likhega ,yakin nahi aata.Very Nice .

    ReplyDelete
  2. आपका हिंदी ब्लॉग जगत में स्वागत है .आपका लेखन सदैव गतिमान रहे ...........मेरी हार्दिक शुभकामनाएं......

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    ReplyDelete
  4. बहुत खूब विकास जी कुछ पुरानी यादें ताज़ा हो गयीं आपकी रचना पढ़ कर
    ऐसे ही लिखते रहें

    ReplyDelete
  5. ब्लोगिंग जगत मे स्वागत है ।
    सुन्दर रचना के लिए शुभकामनाएं
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

    ReplyDelete
  6. अच्छी कविता है स्वागत है आपका ब्लॉग जगत में
    darddilka

    ReplyDelete
  7. khoobsurat rachna.

    blog jagat men aapke swagat ke saath ek baat , kya co-incidence hai tumhara upnaam swapn hai aur main bhi swapn upnaam se hi rachna karta hun. ab?

    ReplyDelete
  8. Excellent piece of work....simple words are saying a lot !!

    ReplyDelete