Friday, February 6, 2009

स्वप्न के गलियारे में



हैं सत्य ये नयन जब
होगा स्वप्न अस्तित्व भी
स्वप्न के गलियारे में
उन्नत आकाश होता है

ऊसर धरा में अंकुर जैसे
दमक चमक जाते हैं ये
स्वप्न के गलियारे में
कितना उल्लास होता है

अचानक उड़ जाते हैं पखेरू
मेरी सामर्थ्य से कहीं दूर
स्वप्न के गलियारे में
निरर्थक प्रयास होता है

होगा वो भी सत्य ही
तुमने कहा था कभी
स्वप्न के गलियारे में
मरीचिका आभास होता है

ना जाने कैसे क्यूँ
ये भूल गया था मैं
स्वप्न के गलियारे में
घोर कुहास होता है

परंतु आज नवस्वप्न लेकर
मैं फिर निकल पड़ा हूँ
स्वप्न के गलियारे में
जहां मंद प्रकाश होता है

(अस्तित्व - existance; उन्नत- high; ऊसर धरा- barren land; अंकुर- bud
उल्लास - joy; पखेरू - bird; सामर्थ्य- capability; निरर्थक- useless
मरीचिका- mirage; कुहास- fog )


2 comments:

  1. बहुत खूब, स्वप्न के कितने रूप हैं, स्वप्न है तो जीवन है, स्वप्न है तो आस है
    स्वप्न देखना ही जीवन की प्यास है

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  2. swapn dwara swapn ka swagat hai, uttam, umda rachna ke liye badhai.

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